किसने बदला संविधान- किया जातिगत विधान
30 Jul 2026, 04:27 PM
मूल संविधान के अनुच्छेद-15 (1) एवं (2), अनुच्छेद 16 (2), अनुच्छेद-29(2) एवं अनुच्छेद-325 में यह स्पष्ट उल्लेख है कि जाति के आधार पर नागरिकों के मध्य कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा: लेखक आदित्य सिंह अंकुर
लेखक आदित्य सिंह अंकुर
बेधड़क News 24
* किसने बदला संविधान- किया जातिगत विधान
मूल संविधान के अनुच्छेद-15 (1) एवं (2), अनुच्छेद 16 (2), अनुच्छेद-29(2) एवं अनुच्छेद-325 में यह स्पष्ट उल्लेख है कि जाति के आधार पर नागरिकों के मध्य कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।
मूल संविधान में शिक्षा में आरक्षण विषयक कोई प्रावधान नहीं था। अनुच्छेद-15 में दो संशोधनों द्वारा सरकारी एवं प्राइवेट शिक्षण संस्थानों में जातिगत आरक्षण लागू किया गया है। अनुच्छेद-16 (4) में 'पिछड़ी हुई जातियों की बजाय पिछड़े हुए नागरिकों के किसी वर्ग' के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का उल्लेख है अर्थात् मूल संविधान में जातिगत आरक्षण का प्रावधान नहीं था। मानमानी व्याख्या एवं चार संशोधनों के द्वारा नियुक्ति एवं पदोन्नति में जातिगत आरक्षण किया जा चुका है। अनुच्छेद-334 में स्पष्ट उल्लेख था कि लोकसभा एवं विधान सभाओं में एससी/एसटी के पक्ष में किया गया आरक्षण 10 वर्षों बाद स्वतः समाप्त हो जाएगा। सर्वाधिक सात बार संशोधन करके इसे 80 वर्ष तक बढ़ाया जा चुका है। अनुच्छेद-335 में यह स्पष्ट शर्त थी कि सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य होने के आधार पर भी नियुक्ति देते समय पद की योग्यता एवं व्यक्तिगत कुशलता का ध्यान रखना आवश्यक होगा। अटल सरकार द्वारा संशोधन करके न्यूनतम योग्यता की शर्त को शिथिल कर दिया गया।निम्न लिखित संसोधन सरकारो द्वारा किया गया●नेहरु जी द्वारा 1951 मे 1 संसोधन कर के शैक्षिणिक संस्थाओं में एससी/एसटी/ओबीसी के लिए आरक्षण लाया गया ।● 1993 कांग्रेस के नरसिंम्हा राव ने 73 संसोधन कर के पंचायत चुनावों में एससी/एसटी/ओबीसी/महिला के पक्ष में आरक्षण लाया गया ।●1993 मे कांग्रेस के नरसिंम्हा राव ने 74 संसोधन कर के नगर निकाय चुनावों में एससी/एसटी/ओबीसी/महिला के पक्ष में आरक्षण लाये।●1995 मे कांग्रेस से नरसिम्हा राव 77 वां संसोधन करसरकारी नौकरी की पदोन्नति में एससी/एसटी के पक्ष में आरक्षण लाये ।●1999 मे भाजपा+ के अटल बिहारी जी ने 79 वां संसोधन कर के लोकसभा एवं विधान सभाओं में एससी/एसटी का आरक्षण 10 वर्ष बढ़ाये । और ●2000 मे अटल बिहारी ने 81 वां संसोधन कर के योग्य उम्मीदवार न मिलने पर भी एससी/एसटी के लिए आरक्षित सीटों के किसी अन्य वर्ग को दिए जाने पर रोक। (बैकलॉग का नियम) लगाया फिर सन ●2000 मे अटल बिहारी 82 वां संसोधन कर के अनुच्छेद-335 में परन्तुक जोड़कर एससी/एसटी के लिए नियुक्ति एवं पदोन्नति सम्बन्धी योग्यता एवं कुशलता के मानक घटाने की छूट दी । फीर ●2001 मे अटल जी ने 85 वां संसोधन कर के आरक्षण से पदोन्नति पाने वाले एससी/एसटी को वेतन वृद्धि का भी लाभ दिए जाने का प्रावधान किया गया।●2003 मे फिरअटल बिहारी वाजपेयी89 वां संसोधन कर केएससी/एसटी के लिए अलग-अलग राष्ट्रीय आयोग का विधान किया।संविधान में जाति के आधार पर भेदभाव को स्पष्ट रूप से प्रतिबन्धित किये जाने के बावजूद भी जाति के आधार पर परीक्षा की फार्म फीस, अधिकतम आयु सीमा एवं अवसर आदि में विभेद किया जा रहा है, जो संविधान से असंगत है।लेखक:आदित्य सिंह अंकुर
नोट: उपरोक्त लेख में लेखक ने अपने विचार अपने तथ्यों के आधार पर रखे है।विवाद की स्थिति में न्यूज पोर्टल की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।
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