जिला संवाददाता: अभिजीत श्रीवास्तव 

मिर्जापुर । लालडिग्गी स्थित इमलहा नाथ महादेव मन्दिर के विश्व हिन्दू परिषद कार्यालय पर गुरुवार को स्वामी श्रद्धानंद जी का बलिदान दिवस और तुलसी पूजन का कार्यक्रम श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने स्वामी श्रद्धानंद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया साथ ही तुलसी के पौधे का पूजन कर इसके आध्यात्मिक और औषधीय महत्व पर चर्चा की गई।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बजरंग दल के विभाग संयोजक प्रवीण ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी एक महान स्वतंत्रता सेनानी, अद्वितीय शिक्षाविद और आर्य समाज के सन्यासी थे। उन्होंने वैदिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की स्थापना की, जो आज भी भारतीय संस्कृति का प्रमुख केंद्र है। प्रवीण ने स्वामी जी के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए बताया कि 1919 में उन्होंने दिल्ली की जामा मस्जिद से हिन्दू-मुस्लिम एकता की अपील की थी। उन्होंने शुद्धि आंदोलन के माध्यम से लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का साहसिक कार्य किया। 23 दिसंबर 1926 को एक कट्टरपंथी द्वारा उनकी हत्या कर दी गई थी, लेकिन उनके विचार आज भी राष्ट्र निर्माण में प्रासंगिक हैं।इसी कड़ी में तुलसी पूजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए जिला संयोजक अशोक सिंह ने कहा कि तुलसी का पौधा हिन्दू धर्म में पवित्रता और शुद्धि का प्रतीक है। यह न केवल वातावरण से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है, बल्कि सर्दी, खांसी और ज्वर जैसी बीमारियों में औषधि के रूप में भी अत्यंत लाभकारी है। जिला सह संयोजक पवन उमर के सफल संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम में संगठन के तमाम प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे।इस अवसर पर कार्यालय प्रमुख विजय दूबे, समाजसेवी अवनीश उपाध्याय, राजेश सिन्हा, सुब्रतो गुप्ता, चन्द्रप्रकाश, प्रमोद सोनकर, कमलेश मौर्य, नीरज गुप्ता, अमरनाथ अग्रवाल, हेमन्त, पवन मिश्रा, श्याम सोनी, शोभित पाल, त्रिलोकी नाथ, सुनील मुसद्दी और श्रीकिशन कसेरा समेत भारी संख्या में कार्यकर्ता व पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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कार्यक्रम में उपस्थित विहिप बजरंग दल जिला मिर्जापुर के कार्यकर्ता 
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सत्संग करते विहिप बजरंग दल कार्यकर्ता
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कार्यक्रम में उपस्थित विहिप बजरंग दल कार्यकर्ता