यूजीसी एक्ट संशोधन को बताया सामाजिक समरसता के लिए खतरनाक 

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट देशभर में हिंदुत्व के लिए काम करने वाली और भगवान श्री कृष्ण जन्मभूमि मथुरा विवाद मामले की अधिवक्ता रीना एन सिंह ने यूजीसी एक्ट संशोधन को हिंदुत्व, सामाजिक समरसता और देश की अखंडता के लिए खतरनाक बताया है। उन्होंने कहा कि जब देश का बटवारा धर्म के नाम पर हुआ तो जाति के नाम पर बार बार क्यों बाँटा जा रहा है? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत में लोकतंत्र धीरे-धीरे सिर्फ़ काग़ज़ों में सिमट कर रह जाएगा ?क्या जनता की आवाज़ अब कोई नहीं सुनेगा? उन्होंने कहा कि इससे देश की युवा पीढ़ी जो शिक्षा प्राप्त करने के लिए संस्थानों में मिल जुल कर रहती है उनके बीच में वैमनस्यता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि देश के लोकप्रिय नेता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि बटोगे तो कटोगे दूसरी तरफ केंद्र सरकार देश को बांटने का ही संशोधन लेकर आती है यह किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

रीना एन सिंह ने कहा कि विपक्ष को इस मुद्दे पर सरकार को घेरना चाहिए विपक्ष का काम केवल बयान देना नहीं होना चाहिए बल्कि सकारात्मक विरोध दर्ज कराना भी होना चाहिए। गाय को राष्ट्रीय जननी घोषित करने के लिए देशभर में कार्यक्रम करने वाली रीना एन सिंह ने देश की जनता से अपील करते हुए कहा कि लोगों को अपने सांसदों और विधायकों से मिलकर इस मुद्दे को उठाना चाहिए ताकि सरकार के इस संशोधन का विरोध किया जा सके। पिछड़ा और दलित वर्ग को आरक्षण देते समय कमजोर आर्थिक आधार को प्राथमिकता में रखने की सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करने वाली एडवोकेट रीना एन सिंह ने कहा कि आज यूजीसी समानता के नाम पर देश के युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है, यदि आज हम चुप रहे, तो कल हमारी शिक्षा, हमारी मेहनत और हमारा आत्मसम्मान सब अर्थहीन कर दिए जाएंगे। आखिर क्यों अब कॉलेज व यूनिवर्सिटी में भी जातिवाद का जहर घोला जा रहा है? उन्होंने देश के हर नागरिक से अपील की है कि इसका विरोध करें तभी सामाजिक समरसता स्थापित हो पाएगी।