फर्जी फर्म बनाकर कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी करने वाले दो आरोपित गिरफ्तार,भेजा जेल
22 Dec 2025, 09:02 AM
जहरीला कोडीनयुक्त कफ सिरप मामला,पूर्वांचल का नशीला फर्जी व्यापार उजागर
कोडीनयुक्त कफ सिरप मामला में दो आरोपित गिरफ्तार
बेधड़क News 24
कोडीनयुक्त कफ सिरप मामला
जिला संवाददाता: अभिजीत श्रीवास्तव
अदलहाट (मिर्जापुर)। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ड्रग लाइसेंस बनवाकर प्रतिबंधित कोडीनयुक्त कफ सिरप काg काला कारोबार करने वाले दो आरोपितों को अदलहाट पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार करके जेल भेज लिया। पकड़े गए आरोपितों ने कागजों पर फर्जी कंपनियां खोलकर करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेनदेन किया था। पुलिस ने दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट में कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया है।प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार सेठ ने बताया कि औषधि निरीक्षक संतोष कुमार पटेल की 4 दिसंबर को एनडीपीएस व औषधि प्रशासन सामग्री अधिनियम की धाराओं पर नरायनपुर क्षेत्र के अक्षत यादव (मेसर्स एके डिस्ट्रीब्यूटर्स सिकरा बरईपुर) और अजित यादव (निहाल डिस्ट्रीब्यूटर्स मिर्जापुर खुर्द अचितपुर) के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए कि आरोपितों द्वारा संचालित फर्में मौके पर मौजूद ही नहीं थीं।जांच रिपोर्ट ए.के. डिस्ट्रीब्यूटर्स एवं निहाल डिस्ट्रीब्यूटर्स की संदिग्ध गतिविधियों का विवरण:जांच के दौरान ए.के. डिस्ट्रीब्यूटर्स के संबंध में यह तथ्य प्रकाश में आया कि उक्त फर्म अपने पंजीकृत पते पर क्रियाशील नहीं है। फर्म का गठन केवल कागजों पर किया गया था और वहां दवा के व्यवसाय से संबंधित कोई भी वास्तविक गतिविधि नहीं पाई गई। अभियुक्त द्वारा ड्रग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए नरायनपुर के जिस पते का उपयोग किया गया, वह आधार कार्ड पूरी तरह फर्जी पाया गया। विवेचना में अभियुक्त का वास्तविक पता मोहल्ला वाजिदपुर, थाना रामनगर, वाराणसी के रूप में चिन्हित किया गया है। वित्तीय विवरणों की जांच करने पर ज्ञात हुआ कि फर्म का खाता एचडीएफसी बैंक, रामनगर में संचालित है, जिसके माध्यम से लगभग एक करोड़ अट्ठाइस हजार रुपये का संदिग्ध टर्नओवर किया गया है।इसी क्रम में निहाल डिस्ट्रीब्यूटर्स, मीरजापुर खुर्द के विरुद्ध की गई जांच में भी गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। इस फर्म को रांची, झारखंड स्थित शैली ट्रेडर्स द्वारा 100 एम.एल. सीरप की कुल 23,000 शीशियां सप्लाई की गई थीं, किंतु धरातल पर यह फर्म भी पूरी तरह निष्क्रिय पाई गई। विवेचना से स्पष्ट हुआ कि यहां भी व्यवसाय के नाम पर केवल धोखाधड़ी की जा रही थी। फर्म के लाइसेंस हेतु संलग्न आधार कार्ड फर्जी पाया गया है, जबकि बैंक रिकॉर्ड के अनुसार अभियुक्त का सही पता मोहल्ला छोटी गैवी, थाना सिगरा, वाराणसी है। इस फर्म का बैंक खाता कोटक महिंद्रा बैंक, लहुराबीर शाखा में पाया गया है। इन दोनों ही मामलों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस प्राप्त कर अवैध वित्तीय ट्रांजेक्शन और संदिग्ध व्यापार की पुष्टि होती है।
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