चंदौली। धानापुर विकास खंड के 65 गांवों में जर्जर तारों से बिजली सप्लाई की जा रही है। जो बिजली विभाग की घोर लापरवाही है। विद्युत उपकेंद्र धानापुर की हालत बहुत ही चिंता जनक है। मशीनें तो जर्जर हो ही गई है, अलग अलग फीडरो की मेन लाइन की तार जीर्ण शीर्ण हो गई है। आलम ये है कि 1970 में लगे 11 हजार के विद्युत तार अब तक नहीं बदले जा सके। इस वजह से न केवल तार टूटकर गिर रहे है बल्कि दुर्घटनाओं को भी दावत दे रहे है।उक्त उपकेंद्र से जुड़े धानापुर देहात धानापुर टाउन, हिंगुतर, धराव, तोरवा और अटौली सहित आधा दर्जन फीडर है। जिससे कुल 65 गांवों की विद्युत आपूर्ति की जाती है। उपकेंद्र से उन गांवों को जोड़ने वाली 11 हजार की मेन लाइन की तार बेहद कमजोर है। इस वजह से टूटकर गिर जाते है। जर्जर तारों से बिजली सप्लाई करना मानव जीवन को खतरा उत्पन्न कर रहा है। मामूली हवा बारिश में तार टूटकर गिर जाते हैं जिससे विद्युत आपूर्ति ठप हो जाती है। मामला प्रकाश में आने के बाद मानवाधिकार सी डब्लू ए के चेयरमैन योगेंद्र कुमार सिंह (योगी) ने प्रकरण की शिकायत आयोग में भेजकर जर्जर तार एवं अन्य जर्जर उपकरण बदलने का अनुरोध किया था। आयोग ने मामले पर दिनांक 17 अप्रैल 2026 को सुनवाई करते हुए कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप पहली नजर में पीड़ित के मानवाधिकारों का उल्लंघन लगते है। आयोग ने मामले को प्रोटेक्शन ऑफ ह्यूमन राइट एक्ट 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान लिया। एनएचआरसी ने मामले पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए सीएमडी यूपीपीसीएल लखनऊ और एमडी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड वाराणसी को नोटिस जारी कर 6 सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का सख्त आदेश दिया है।

image