जिला संवाददाता: अभिजीत श्रीवास्तव 
 (मीरजापुर)। विश्व हिंदू परिषद जिला चुनार के जमालपुर प्रखंड की ओर से मंगलवार को ओढ़ी स्थित एक शैक्षणिक संस्थान परिसर व बहुआर हनुमान मंदिर परिसर में परिषद का स्थापना दिवस मनाया गया। इस दौरान पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने संगठन को मजबूत करने तथा सामाजिक समरसता के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।मुख्य वक्ता जिला संगठन मंत्री सुरेश सनातन ने कहा कि छुआछूत, भेदभाव और सामाजिक दूरी को समाप्त कर संगठित एवं समरस हिंदू समाज के निर्माण के उद्देश्य से वर्ष 1964 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुंबई के संदीपनी साधनालय में विश्व हिंदू परिषद की स्थापना हुई थी। उन्होंने कहा कि स्थापना के समय देश के संतों, धार्मिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिंदू समाज को संगठित एवं सशक्त बनाने का संकल्प लिया था।उन्होंने कहा कि परिषद जाति, मत, पंथ, भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता और एकता को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने वर्ष 1966, 1978 और 1989 में आयोजित विश्व हिंदू सम्मेलनों का उल्लेख करते हुए संगठन के विभिन्न सामाजिक एवं सेवा कार्यों की जानकारी दी।जिला संगठन मंत्री ने कहा कि गौरक्षा, सेवा कार्य, सामाजिक जागरूकता सहित विभिन्न आयामों के माध्यम से परिषद की गतिविधियां लगातार विस्तार पा रही हैं। श्रद्धेय अशोक सिंहल के जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन के कार्यों को गांव-गांव तक पहुंचाने और अधिक से अधिक लोगों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का आह्वान किया।

बोधकथा के माध्यम से बच्चों को दिया एकता और संगठन का संदेश
सुरेश सनातन जी ने विद्यालय के बच्चों को एक प्रेरक बोधकथा के माध्यम से एकता, समन्वय और संगठन की शक्ति का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि अकेला व्यक्ति या कमजोर समूह विपरीत परिस्थितियों का सामना आसानी से नहीं कर पाता, लेकिन जब लोग एकजुट होकर संगठित रूप से आगे बढ़ते हैं तो बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि कोई व्यक्ति किसी कुत्ते पर पत्थर मारता है तो कुत्ता अपनी जान बचाने के लिए वहां से भाग जाता है। इसके विपरीत यदि कोई व्यक्ति मधुमक्खियों के छत्ते पर पत्थर मारता है तो परिस्थिति बिल्कुल बदल जाती है। मधुमक्खियां अपने छत्ते और समुदाय की रक्षा के लिए एकजुट होकर बाहर निकलती हैं और पत्थर मारने वाले का पीछा करने लगती हैं। उनसे बचने के लिए उसे काफी दूर तक भागना पड़ सकता है और कई बार पानी में कूदकर या स्वयं को चादर-कंबल से ढककर बचाव करना पड़ता है।
उन्होंने बच्चों को समझाया कि इस उदाहरण का उद्देश्य किसी के प्रति आक्रामकता को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि संगठित होकर अपनी सुरक्षा, सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की सीख देना है। मधुमक्खियां हमें सिखाती हैं कि समूह की शक्ति तभी प्रभावी होती है, जब उसके सदस्य आपसी सहयोग, अनुशासन और समन्वय के साथ कार्य करें।
उन्होंने कहा कि समाज में भी एक-दूसरे का सहयोग, आपसी सम्मान, सद्भाव और संगठन की भावना मजबूत होनी चाहिए। जब हम छोटे-छोटे मतभेदों से ऊपर उठकर एक-दूसरे के साथ खड़े होते हैं, तो समाज अधिक मजबूत और सक्षम बनता है अंत में उन्होंने बच्चों का आह्वान किया कि वे मधुमक्खियों से एकता, अनुशासन, सहयोग और संगठन की शक्ति की प्रेरणा लें तथा विद्यालय और समाज में मिल-जुलकर रहने की भावना को मजबूत करें।कार्यक्रम में जिला मंत्री कृष्ण गोपाल,जिला सहसंयोजक शुभम श्रीवास्तव, जिला सामाजिक समरसता प्रमुख सालिक राम, जिला सेवा प्रमुख प्रेम बहादुर,रितेश केशरी, पंकज समेत बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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