दलित आदिवासी महिलाओं का जीवन संवार रही हैं प्रतिभा
26 Nov 2025, 03:02 PM
शिक्षा, सेनेटरी पैड, कंबल और जरूरी सामान प्रदान कर दे रही हैं संबल, चकिया से विशेष लगाव
महिलाओं को जागरूक करती समाजसेविका प्रतिभा सूर्या सिंह
बेधड़क News 24
चकिया (चंदौली)। खुद के लिए तो सभी जीते हैं, लेकिन जो दूसरों के लिए भी जिए वास्तव में उसी व्यक्ति के अंदर मानवता जिंदा होती है। यह कहना है समाजसेविका प्रतिभा सूर्या सिंह के। प्रतिभा आज अपने कर्म से हजारों महिलाओं का जीवन संवार कर उन्हें जीवन की मुख्य धारा में लाने के लिए जमीनी स्तर पर कार्य कर रही हैं।
सोनभद्र जिले के दुद्धी में 03 अक्टूबर, 1988 को डॉ. सूर्यनाथ सिंह की पुत्री के रूप में जन्मी प्रतिभा की प्रारंभिक शिक्षा आदर्श विद्यालय दुद्धी से प्राप्त कर इंटरमीडिएट की शिक्षा आदित्य नारायण राजकीय इंटर कॉलेज से पूरा किया। तत्पश्चात बीएचयू से बी.ए और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए (इतिहास) करने के बाद प्रतिभा ने आगरा विश्वविद्यालय से बीएड की डिग्री प्राप्त की। बकौल प्रतिभा बीएचयू में अध्ययन के दौरान ही यहां की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) से जुड़ी और यहीं से समाजसेवा का भाव मन में जागृत हुआ।
प्रतिभा ने चकिया, नौगढ़ और सोनभद्र की दलित आदिवासी महिलाओं का जीवन संवारने का बीड़ा उठाया। महिलाओं और उनके बच्चों को शिक्षा दान, महिलाओं को सेनेटरी पैड, बच्चों को कॉपी किताब, सर्दियों में कंबल वितरण, पर्यावरण जागरूकता, ब्लड डोनेशन आदि पर काम करने लगीं। कुछ समय तक इन्होंने चित्रकूट में अनाथ आश्रम के बच्चों के जीवन उत्थान के लिए भी काम किया।
डाला सोनभद्र में एक सीमेंट फैक्ट्री द्वारा भारी मात्रा में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर उसके खिलाफ आवाज उठाई और इसे जन आंदोलन बना दिया था। मजबूर होकर फैक्ट्री मालिक को इसे पर्यावरण के अनुकूल बनाना पड़ा।
प्रतिभा बचपन से ही पढ़ने लिखने में होनहार हैं। उनका सपना एक पीसीएस अधिकारी बनने का था, किंतु प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था। अनेक बार यूपी पीसीएस की परीक्षा दी, किंतु हर बार पारिवारिक समस्याएं इनके मार्ग का बाधक बनीं। प्रतिभा पीसीएस अधिकारी तो नहीं बन पाईं, लेकिन इस दौरान इनकी शादी पीसीएस अधिकारी विकास सिंह से हो गई।
ये सामाजिक संस्था गोटूल इंडिया से जुड़कर यूपी पीसीएस की तैयारी करने वाले प्रतियोगी छात्र छात्राओं को प्रोत्साहित भी कर रही हैं। प्रतिभा ने बताया कि चकिया से मेरा विशेष लगाव है। मेरा बचपन चकिया की गलियों में ही बीता है। मेरे पिता स्व. सूर्यनाथ सिंह यहीं पर सरकारी डॉक्टर थे। फिलहाल चकिया के लिए कुछ अच्छा करने की सोच रही हूं।
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