(मिर्जापुर)। जमालपुर विकास खंड के ग्राम पंचायत हिनौती माफी अंतर्गत अलमापुर गांव में बना नया प्राथमिक विद्यालय 'समग्र शिक्षा' अभियान के दावों की पोल खोल रहा है। लाखों रुपये के सरकारी बजट से तैयार यह चमचमाता भवन बच्चों के भविष्य संवारने के बजाय सफेद हाथी साबित हो रहा है। विडंबना यह है कि साल 2023 में स्थापना के बाद से इस विद्यालय के गेट का ताला तक नहीं खुला है।असामाजिक तत्वों का बना अड्डा:ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल का संचालन न होने से परिसर अब जुआरियों और असामाजिक तत्वों का केंद्र बनता जा रहा है। ग्रामीण राजेश मिश्रा व विपिन पाठक ने बताया कि भवन की सुरक्षा भगवान भरोसे है। चोरों ने यहाँ लगा समरसेबल पंप उखाड़ लिया और लापरवाही से छत पर रखी पानी की टंकी गायब हो गई। कमरों में धूल जमी है और शौचालय उपयोग से पहले ही जर्जर हो रहे हैं।ग्रामीणों में आक्रोश:मृत्युंजय मिश्रा,प्रमोद पाठक,विपिन पाठक और शान्तनु चौबे सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ सरकार बेहतर शिक्षा का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ बना-बनाया स्कूल धूल फांक रहा है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और बीएसए से मांग की है कि इस सरकारी धन की बर्बादी की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और तत्काल शिक्षकों की नियुक्ति कर पठन-पाठन शुरू कराया जाए।अधिकारी का पक्ष: "विद्यालय में छात्र संख्या कम होने के कारण बच्चों को हिनौती माफी विद्यालय से संबद्ध (अटैच) किया गया है। भवन और वहां मौजूद सामान की देखरेख की जिम्मेदारी हिनौती माफी के प्रधानाध्यापक को दी गई है।" देवमणि पाण्डेय, खंड शिक्षा अधिकारी, जमालपुर

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जर्जर पड़ा शौचालय,चोरों का बना अड्डा
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विद्यालय का स्थापना शिलापट्ट
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विद्यालय का रसोईघर जिसका कभी नहीं खुला ताला 
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नौनिहालों के भविष्य के दरवाज़े पड़े बंद