image
संगोष्ठी में संबोधित करते मुख्य अतिथि 

चंदौली। विशाल भारत संस्थान और आदर्श इंटर कॉलेज चतुरीपुर के संयुक्त तत्वाधान में शुक्रवार को 'सामाजिक परिवर्तन में शिक्षा की भूमिका' विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से समाज में आवश्यक और सकारात्मक बदलाव लाने के तरीकों पर गहन विमर्श करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं पुष्पावर्चन से हुआ। जिसके बाद विद्यालय की छात्रा चन्दा व आँचल द्वारा सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। स्वागत भाषण विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय परिषद सदस्य डॉ.मुकेश श्रीवास्तव ने दिया, जबकि विद्यालय का परिचय प्रबंधक संतोष कुमार सिंह ने कराया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता रंग बहादुर सिंह, उपाध्यक्ष-प्रबंध समिति ने की और संचालन जिला चेयरमेन गोविन्द श्रीवास्तव ने किया।

संतोष सिंह और हिम्मत बहादुर सिंह ने स्वागत अध्यक्ष की भूमिका निभाई। शिशिर सिंह (पूर्व सदस्य, रेलवे बोर्ड) ने संयोजक की भूमिका निभाई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आरपीएफ कमांडेंट, प्रयागराज, विजय प्रकाश पंडित ने विशाल भारत संस्थान के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान निराश्रित बच्चों को पढ़ाकर उनके जीवन को दिशा व दशा देने का कार्य करता है। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता त्याग मांगती है और यदि जीवन में आप संस्कारित हैं तो आप सफल हैं।

मुख्य वक्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष विशाल भारत संस्थान डॉ. राजीव गुरुजी ने कहा कि "भारत देश भावनाओं, करुणा व सद्प्रेम का देश है।" उन्होंने कहा कि नौकरी प्राप्त करना शिक्षा का उद्देश्य नहीं है। विद्यावान वह होता है जो दूसरों की चिंता करता है। गुरुजी ने त्याग के विषय में भगवान राम का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि दुनिया के इतिहास में त्याग का सबसे बड़ा उदाहरण भगवान राम हैं।

राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अर्चना भारतवंशी ने विषय प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि नेता दल बदलते हैं, डॉक्टर दिल बदलते हैं, पर गुरुजी लोगों का जीवन बदलते हैं। शिक्षा इसलिए जरूरी है जिससे हम सही व गलत का फर्क समझ सकें। उन्होंने बताया कि शिक्षित वह लोग होते हैं जो शिक्षित होने के बाद दूसरों की मदद करते हैं। उन्होंने विश्व के पहले अनाज बैंक और लमही में स्थित विश्व के पहले सुभाष मंदिर का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम के दौरान चयनित 11 महिलाओं को कम्बल वितरण किया गया और विद्यालय के ग्यारह बच्चों को मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित भी किया गया।