पत्रकार विषम परिस्थितियों में समाचार संकलन एवं सम्प्रेषण करते हैं। इसलिए उन्हें संरक्षित किया जाना बेहद जरूरी है। - दीपक सिंह वरिष्ठ पत्रकार चंदौली, एनयूजेआई

चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी सहित गृह और विधि विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस, सीबीआई से भी मांगा गया है जवाब

नई दिल्ली। यह पहली बार है जब किसी स्टिंग ऑपरेशन के बाद पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट ने इतना सख्त और सीधा हस्तक्षेप किया है। मध्यप्रदेश के सागर जिले में पुलिस थानों की अवैध गतिविधियों का खुलासा करने वाले तीन पत्रकारों को जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच ने तत्काल राहत देते हुए साफ कहा कि इनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं होगी। यह आदेश पूरे प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा से जुड़े मामलों के लिए एक मिसाल माना जा रहा है। 
कोर्ट ने मामले की गंभीरता देखते हुए मुख्य सचिव, डीजीपी और प्रमुख सचिव (गृह व विधि) को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही सीबीआई को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिका में सागर आईजी हिमानी खन्ना, एसपी विकास सहवाल और गोपालगंज, मोतीनगर, बहेरिया व मकरोनिया के चार थाना प्रभारियों को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाया गया है। पत्रकारों ने अदालत को यह आशंका बताई थी कि स्टिंग सामने आने के बाद पुलिस उन्हें झूठे मामलों में फंसाकर गिरफ्तार कर सकती है।
सुनवाई के दौरान बेंच ने दैनिक भास्कर में 30 नवंबर 2025 को प्रकाशित स्टिंग रिपोर्ट को पढ़ा और मामले को गंभीरता से लिया। रिपोर्ट में पुलिस की संदिग्ध भूमिका उजागर हुई थी।
अब अगली सुनवाई 27 जनवरी 2026 को होगी। यह मामला सिर्फ सागर जिले की पुलिस व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रदेश में खोजी पत्रकारिता की सुरक्षा की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।