हिन्दू सम्मेलन समाज के एक परिवर्तनकारी जागरण का शंखनाद है - मुरलीपाल
29 Dec 2025, 07:50 PM
सत्ता से सुख की प्राप्ति नहीं होती उसके लिए अपने संस्कृति को परंपराओं को समझना होगा। उन्होंने कहा कि यदि देखा जाए तो पुरातन भारतीय संस्कृति में कभी भी किसी के साथ किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया गया है।
हिन्दू सम्मेलन में भारत माता की आरती करते अथिति व जनमानस
बेधड़क News 24
धानापुर (चंदौली)। हमारा प्रत्यक्ष आचरण ही समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त कर सकता है, जिससे वास्तविक सामाजिक समरसता स्थापित होगी। भारत आज विकसित राष्ट्र बनने की दहलीज पर खड़ा है। ऐसे में हमें केवल गर्व करने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि अपने सामर्थ्य को बढ़ाकर वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करना है। उक्त विचार सकल हिन्दू समाज समिति मिर्जापुर द्वारा सोमवार को आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन में बतौर मुख्य वक्ता प्रांत कार्यवाह मुरलीपाल ने समाजिक एकता और समरसता के भाव को लेकर रखा। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि यह विराट हिन्दू सम्मेलन, समाज में एक परिवर्तनकारी जागरण का शंखनाद है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि पूर्व में विदेशी आक्रमणों के कारण भारत की वैभवशाली सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हुई थी।
जिसे गुरु गोविंद सिंह जैसे महापुरुषों और छत्रपति शिवाजी महाराज के 'हिंदवी स्वराज' के संकल्प ने पुनर्जीवित किया। आज वहीं दृश्य पुनः निर्मित हो रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात विद्वान सोमदत्त द्विवेदी, मुख्य अतिथि आचार्य भारत भूषण संत रविदास मंदिर वाराणसी के मुख्य महंत रहे। विशिष्ट अतिथि मातृ शक्ति जीरा देवी, पूर्व प्रमुख विश्वनाथ प्रताप सिंह व कन्हैया राम शास्त्री रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रवज्जलन कर किया गया। हिन्दू सम्मेलन में जनसमुदाय को संबोधित करते हुए संत रविदास मंदिर वाराणसी के मुख्य महंत भारत भूषण जी महराज ने कहा कि हम अपनी परंपराओं से दूर होते जा रहे है।
जबकि दुनिया को जीने की कला भारत की संस्कृति में शिकाया है। हमें अपनी परंपराओं को समझना होगा। कहा कि अगर संघ को समझना है तो उनके स्वयंसेवकों के संपर्क में रहिए उसके बाद आपको ज्ञात होगा कि संघ के प्रचारक स्वयंसेवक सच में संत है। पढ़े लिखे युवा आज सनातन परंपराओं के खिलाफ बाते करते है। उनसे संवाद करिए ताकि उनके मन का वहम मिट सके। दुनिया के इतिहास में भारत में ही समृद्धि थी। जातीयता में बट कर हिन्दू कट रहा है। पीछे देख लीजिए जो भी आया हिंदुओं को केवल लूटा, मुगलों ने हमारी माताओं बहनों को निशाना बनाया। जबरन अपना धर्म कबूल करवाया। हमें खुद को समझने की आवश्यकता है। गुरु रविदास जी या बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर जैसे पुरुषों से हमे सिख लेनी चाहिए वो भगवा को धारण किए।
सत्ता से सुख की प्राप्ति नहीं होती उसके लिए अपने संस्कृति को परंपराओं को समझना होगा। उन्होंने कहा कि यदि देखा जाए तो पुरातन भारतीय संस्कृति में कभी भी किसी के साथ किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया गया है। हमारे वेदों में भी जाति या वर्ण के आधार पर किसी भेदभाव का उल्लेख नहीं है। गुलामी के सैकड़ों वर्षो में आक्रमणकारियों द्वारा हमारे धार्मिक ग्रंथों में कुछ मिथ्या बातें जोड़ दी गई, जिससे उनमें कई विकृतियां आ गईं। इसके कारण आज भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। वेदों में जाति के आधार पर नहीं, बल्कि कर्म के आधार पर वर्ण व्यवस्था बतायी गयी है। सम्मेलन में अतिथियों को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया। इस अवसर पर मिर्जापुर प्रधान राजेश सिंह, सह खंड कार्यवाह शैलेश चंद्र योगी, ज्ञानप्रकाश सिंह, शिवा सिंह, प्रमोद सिंह, प्रदीप सिंह, विनोद सिंह, रामलक्ष्मण यादव सहित अन्य सैकड़ों हिन्दू समाज उपस्थित रहा।
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