दीपक सिंह

धानापुर। धीरे-धीरे अब गंगा का जलस्तर घट रहा है किंतु इसके साथ ही नदी के किनारे की उपजाऊ भूमि का कटाव तीव्र गति से शुरू हो गया है। गंगा किनारे के स्थित भूमि लागातार कट-कट कर नदी में गिर रही है। गंगा कटान का यह भयावह दृश्य देखकर तटवर्ती गांव के लोग सहमे हुए हैं। महीनों पहले आई बाढ़ और बारिश के चलते उफनाई गंगा का जलस्तर अब तेजी से घट रहा है, लेकिन कटान की गति और तेज हो गई है। धानापुर क्षेत्र का किसान पांच दशक से गंगा कटान के चलते परेशान है। अब तक हिंगुतरगढ़, बुद्धपुर और नौघरा गांव के ही किसानों की पचासों बीघे से ज्यादा उपजाऊ भूमि गंगा के फेटे में चली गई है। वहीं इतनी ही उपजाऊ जमीनें अब भी कटान की जद में हैं। जो कभी भी गंगा की धारा में विलीन हो सकती है। दशकों से तटवर्ती गांव के किसानों की बड़े पैमाने पर उपजाऊ भूमि गंगा कटान के चलते बर्बाद हो रही है। कटान से महुंजी, जिगना, बयानपुर, प्रहलादपुर, गुरैनी, कवलपूरा, सोनहुली, नगवां, मेढवा, अमादपुर, मिश्रपुरा, महमदपुर, नरौली, रायपुर, नौघरां, बुद्धपुर, हिंगुतरगढ़, प्रसहटा, रामपुर दीयां, सहेपुर आदि अन्य गांव के सैकड़ों किसान प्रभावित है। अब तक इन गांवों के किसानों की कई एकड़ उपजाऊ जमीन गंगा के फेटे में समा चुकी है। एक बार फिर से जब गंगा का जलस्तर घटने लगा है तो तटीय इलाके के लोगों को तीव्र कटान का खतरा सताने लगा है। वैसे तो नदी की बेदर्द लहरें किनारे की उपजाऊ भूमि को काटने में निरंतर लगी हुई है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि कभी न कभी सरकारें उनके दर्द सुनेंगी और उन्हें गंगा की कटान से मुक्ति दिलाएंगी।
जनप्रतिनिधि भी कटान को लेकर हैं मौन
गंगा के किनारे स्थित जो गांव कटान की भीषण त्रासदी झेल रहे हैं, उन्हें इससे मुक्ति दिलाने को लेकर अब भी प्रशासन कोई पहल नहीं कर रहा है। किसानों को दुःख इस बात का है कि सांसद वीरेंद्र सिंह एवं विधायक सुशील सिंह भी गंगा कटान की समस्या को लेकर लोकसभा और विधानसभा में मुखर नहीं हो पा रहे हैं। जबकि कड़वा सच तो यह है कि यदि ये नेतागण ही चाह लें तो गंगा कटान की समस्या से किसानों को मुक्ति मिलना संभव हो सकता है।

गंगा कटान तटीय किसानों के लिए बहुत बड़ी समस्या है। इसके निस्तारण को लेकर लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा सभी में आवाज हर हालत में उठाई चाहिए। लेकिन जनप्रतिनिधियों की चुप्पी समझ से परे है।गोविंद उपाध्याय, संयोजक -धानापुर विकास मंच