धानापुर। चहनियाँ वन रेंज के धानापुर थाना अंतर्गत अमादपुर गांव स्थित अति प्राचीन झारखंडे महादेव मंदिर परिसर में हरे पेड़ो की कटाई जोरो से जारी है। मिली जानकारी के अनुसार मंदिर परिसर लगभग 15 बीघे में फैला है। जिसमें प्राचीन मंदिर के साथ साथ लगभग हजारों हरे पेड़ खड़े है। जो गंगा कटान को रोकने का भी काम करते है। वनों से हरे पेड़ पौधे की कटाई धड़ल्ले से जारी है। मामला संज्ञान में आने के बावजूद विभाग उदासीन बने हैं। प्रतिदिन हजारों की संख्या में लकड़ी माफियाओं द्वारा हरे पेड़ पौधे काटे जा रहे हैं। जिससे पर्यावरण दूषित हो रहा है। जिसका दुष्प्रभाव जलवायु पर पड़ते दिख रहा है। दुखद पहलू तो यह है कि शासन प्रशाशन द्वारा एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत वृहद वृक्षारोपण किया जा रहा है। ताकि पर्यावरण को दूषित होने से रोक जा सके। वहीं दूसरी तरफ अमादपुर गांव में जितना पौधारोपण किया जाता है। उससे अधिक पेड़ पौधे काटे जा रहे हैं। जिसे विभाग जानकार भी अनजान बने हैं। हरे पेड़ पौधे में इमारती लकड़ी भी होते हैं। जिसे निर्ममता से काटकर जलावन बनाया जाता है, या फिर मोटे इमरती पेड़ को काटकर आरा मशीन पर लकड़ी माफिया द्वारा पहुंचाया जाता है। हरे पेड़ पौधे काटने से जुड़े लोग इसे व्यापार का रूप दे रखे हैं। जिसका नतीजा है कि दिन के उजाले में लकड़ी को जंगल में संग्रह किया जाता है। फिर रात के अंधेरे में वाहनों द्वारा लकड़ी को अमादपुर से बाहर के बाजार भेजा जाता है। स्थानीय स्तर पर ठेला और सायकिल से लकड़ी को गांव, बाजार पहुंचाया जाता है। स्थानीय गांव बाजार में जंगल से काटे लकड़ी को दो से तीन सौ रुपए प्रति मन बेचा जाता है। जिसके लेकर स्थानीय लोगों में काफ़ी आक्रोश है। उच्चाधिकारियों का ध्यान आकर्षित करते हुए लोगों ने कहा कि हरे पेड़ की कटाई अगर जल्द से जल्द नहीं रोकी गई तो पर्यावरण की बहुत बड़ी हानि होगी।