सेवराई (गाजीपुर)। तहसील अंतर्गत ग्राम अमौरा में मां काली रामनवमी समिति अमौरा द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय देवी माहात्म्य कथा के दूसरे दिन भक्तिमय माहौल के बीच महिषासुर जन्म और वध की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही, जहां भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।कथा के दौरान बताया गया कि देवताओं के तेज से अष्टभुजी मां दुर्गा का दिव्य प्राकट्य हुआ, जिन्होंने अधर्म और अत्याचार के प्रतीक महिषासुर का संहार करने का संकल्प लिया। महिषासुर ने अपने सेनानायक चिक्षुर के साथ देवी दुर्गा से भीषण युद्ध किया और अपनी मायावी शक्तियों से अनेक रूप धारण कर देवी को भ्रमित करने का प्रयास किया। लेकिन अंततः जब वह गज (हाथी) का रूप धारण कर युद्ध करने लगा, उसी समय मां दुर्गा ने अपने त्रिशूल से उसका वध कर दिया।महिषासुर के वध का प्रसंग सुनते ही पूरा पंडाल “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा। उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर होकर माता रानी की आराधना में लीन हो गए।कथा वाचक व्याख्यान वाचस्पति डॉ. बृजेशमणि पाण्डेय ने अपने प्रवचन में पुत्र के कर्तव्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संतान का धर्म केवल परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति भी होता है। उन्होंने महिलाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें मां दुर्गा की तरह शक्तिशाली और आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि “विकसित, दिव्य और नव्य भारत के निर्माण के लिए महिलाओं को अपने अधिकार और कर्तव्यों के प्रति सजग होकर आगे आना होगा। उन्हें नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए स्वयं को तैयार करना चाहिए, तभी भारतीय संस्कृति की रक्षा और राष्ट्र का उत्थान संभव है।”कथा के दौरान भजन-कीर्तन और धार्मिक वातावरण ने पूरे गांव को भक्तिमय बना दिया। कथा सुनकर ग्रामवासी और क्षेत्रवासी अत्यंत आनंदित और उत्साहित नजर आए। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए समुचित व्यवस्था की गई, जिससे कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।