अदलहाट (मिर्जापुर)। "बाधाएं आती हैं आएं, घिरें प्रलय की घोर घटाएं..." अटल जी की इन पंक्तियों के साथ बुधवार को लालता सिंह राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पूर्व प्रधानमंत्री को याद किया गया। अवसर था "राष्ट्र निर्माण के प्रेरणा स्रोत: अटल बिहारी वाजपेई" विषयक विचार गोष्ठी का, जहाँ वक्ताओं ने उनके कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर विस्तार से चर्चा की।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य प्रोफेसर सुरेंद्र कुमार सिंह यादव ने दीप प्रज्वलित कर गोष्ठी का आगाज़ किया। उन्होंने कहा कि वाजपेई जी का राजनीतिक चिंतन मात्र सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र कल्याण के लिए था। उनका पूरा जीवन भावी पीढ़ी के लिए एक खुली किताब की तरह है।सामाजिक सरोकारों पर रहा जोरविशिष्ट वक्ता प्रोफेसर गोमतेश्वर पाल ने अटल जी के सामाजिक सरोकारों और उनके जीवन के संघर्षपूर्ण पहलुओं को साझा किया। कार्यक्रम संचालक डॉ. हेरंब पांडेय ने उनके ऐतिहासिक राजनीतिक योगदानों को समझाया, जबकि डॉ. प्रणव कुमार गौरव ने "कदम मिलाकर चलना होगा" कविता के ओजस्वी पाठ से सभागार में ऊर्जा भर दी।महाविद्यालय की मेधावी छात्राओं साधना यादव, साक्षी द्विवेदी, प्रियंका कुमारी और पूजा पाठक ने अपने भाषणों के माध्यम से अटल जी की कविताओं और उनके राष्ट्र निर्माण के विजन को प्रस्तुत किया।संगोष्ठी में मुख्य रूप से डॉ. प्रेमलता लाल, डॉ. प्रेम सुंदरी, डॉ. सुमिता बनर्जी, डॉ. मनीष, डॉ. अंकित, डॉ. चंदन, डॉ. पूजा, डॉ. गणेश और डॉ. रानी सहित भारी संख्या में छात्राएं एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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गोष्ठी में अपने विचार रखते प्राचार्य प्रोफेसर सुरेन्द्र सिंह यादव
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गोष्ठी से पूर्व चित्र पर माल्यार्पण कर नमन करते प्राचार्य व प्राध्यापकगण