यूपी की राजनीति को बड़ा झटका: बसपा के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, आज बलिया में होगा अंतिम संस्कार
06 Aug 2026, 08:56 AM
उमाशंकर सिंह उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक कद्दावर और प्रभावशाली नेता के रूप में जाने जाते थे। उनके अचानक निधन से बहुजन समाज पार्टी को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। वे लगभग 55 साल के थे और लंबे समय से गंभीर बीमारी (कैंसर) से अस्वस्थ चल रहे थे
स्व. उमाशंकर सिंह
बेधड़क News 24
बलिया। बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता और बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार के शाम निधन हो गया है। उन्होंने दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही समर्थकों और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। उमाशंकर सिंह उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक कद्दावर और प्रभावशाली नेता के रूप में जाने जाते थे। उनके अचानक निधन से बहुजन समाज पार्टी को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। वे लगभग 55 साल के थे और लंबे समय से गंभीर बीमारी (कैंसर) से अस्वस्थ चल रहे थे। जिनका दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में इलाज चल रहा था। उमाशंकर सिंह को बसपा प्रमुख मायावती अपना भाई मानती थीं। वे प्रदेश की भाजपा सरकार के भी करीबी रहे।
2011 में बसपा जॉइन की, तब से लगातार विधायक
उमाशंकर सिंह ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। साल 1990 में वह बलिया के एएसी कॉलेज से छात्रसंघ के महामंत्री चुने गए। यहीं से उनकी सक्रिय राजनीति शुरू हुई। इसके बाद साल 2000 में वह बलिया के जिला पंचायत अध्यक्ष बने और स्थानीय राजनीति में मजबूत पहचान बनाई। 2011 में उन्होंने बसपा जॉइन की। 2012 में पहली बार रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। उस चुनाव में बसपा की सीटें 206 से घटकर 80 रह गई थीं। इसके बावजूद उमाशंकर सिंह ने 84 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए। सपा उम्मीदवार सनातन पांडेय को करीब 52 हजार वोटों से हराया था। उन्होंने 2017 में जीत दोहराई और 2022 में तीसरी बार लगातार विधायक बने। 2022 के चुनाव में बसपा का विधानसभा में खाता सिर्फ उनके दम पर खुला था। लगातार 3 जीत से उन्होंने क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ साबित की।
साल 2012 में उमाशंकर ने 251 लड़कियों का सामूहिक विवाह कराया था। इसके बाद 2016 में उन्होंने 351 हिंदू-मुस्लिम जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया। तब विधायक चर्चा में आए थे।
2017 में अयोग्य घोषित हुए थे
14 जनवरी 2017 को तत्कालीन राज्यपाल राम नाइक ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया था। उन पर रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के उल्लंघन का आरोप था। मामला सरकारी ठेके अपने नाम पर लेने से जुड़ा था। लोकायुक्त की जांच में आरोप सही पाए गए थे। बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग की सिफारिश के बाद उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई थी। यह प्रदेश का पहला मामला था, जब किसी विधायक की सदस्यता पिछली तारीख से समाप्त की गई।
दिनेश प्रताप सिंह से क्या रिश्ता
उमाशंकर सिंह के एजुकेशन की बात करें तो वह 12वीं पास हैं। उमाशंकर सिंह के एकलौते बेटे प्रिंस यूकेश सिंह छात्र शक्ति कंपनी से जुड़े हैं। सोशल मीडिया पर वह खुद को इस कंपनी का सीईओ बताते हैं। वर्ष 2024 में योगी सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने अपनी बेटी कनिका सिंह की शादी उमाशंकर सिंह के बेटे प्रिंस यूकेश से की थी। ऐसे में दिनेश प्रताप सिंह और उमाशंकर सिंह समधी हैं।
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