नया सत्र आरंभ होते ही, निजी स्कूलों में शुरू हो गया कमीशन का खेल, निश्चित दुकानों पर सज गई किताबें, ड्रेस आदि सामान
08 Apr 2026, 10:49 AM
अगर किसी स्कूल के भीतर किताबें या अन्य सामाग्री बिक्री की जा रही हैं तो यह पूरी तरह से गलत है। शिक्षा विभाग से रिपोर्ट तलब कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी - कुंदन राज कपूर, एसडीएम, सकलडीहा।
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संचालकों के शोषण का सर्वाधिक शिकार हो रहा मध्यमवर्गीय परिवार
सरकारी स्कूलों में बेपटरी हुई शिक्षा व्यवस्था, अधिकारी भी बने हुए हैं उदासीन
दीपक सिंह
चंदौली। एक अप्रैल से ही स्कूलों का नया सत्र आरंभ हो चुका है। सरकारी स्कूलों के साथ-साथ निजी स्कूलों में भी नई कक्षाओं में दाखिले का काम चालू हो गया है। इसके साथ ही निजी स्कूलों में कमीशन का खेल भी चल पड़ा है। नया सत्र आरंभ होने के साथ अभिभावकों की परेशानी बढ़ गई है। एक से दो माह की फीस के साथ स्कूलों में डेवलपमेंट फीस के नाम पर ली जाने वाली मोटी रकम भरनी है तो कॉपी किताब भी स्कूल से ही खरीदनी है। सेट भी इतना महंगा है कि उसे खरीदने में अभिभावकों के पसीने निकल जा रहे हैं। क्षेत्र में कई निजी स्कूलों में तो पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक की किताबों का सेट 6 से दस हजार रूपये तक पड़ रहा है। जिम्मेदार और शिक्षा विभाग इस पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है। सैकड़ों की संख्या में संचालित निजी स्कूलों में अलग-अलग प्रकाशनों की पुस्तकों को पढ़ाया जा रहा है। हैरत की बात यह है कि इन निजी स्कूलों में प्रत्येक वर्ष हर कक्षा की किताबों का सिलेबस बदल दिया जाता है। जिसके चलते, प्रत्येक बच्चों को नई किताबें खरीदना मजबूरी है। इसके ड्रेस भी चुनिंदा दुकानों से ही खरीदने का निर्देश दिया जा रहा है। ज्यादातर लोगों का मानना है कि प्रशासनिक उदासीनता के चलते इस तरह की मनमानी निजी स्कूलों के प्रबंधकों द्वारा खुलेआम की जा रही है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की मनमानी के चलते लगातार गिरती जा रही गुणवत्ता और किताबों की महंगाई से अभिभावकों का बजट बिगड़ रहा है। निजी स्कूल के संचालक सिर्फ अपनी कमाई के चक्कर में बेहतर शिक्षा का दावा करके मनमानी कर रहे हैं। सरकार को इनपर शिकंजा कसने के लिए ठोस कानून बनाने की जरूरत है। समय से प्रवेश न करने पर अतिरिक्त शुल्क देने का संदेश भेजा जा रहा है। निजी स्कूलों द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप में किताब, कॉपी, ड्रेस सहित समस्त खर्च का ब्यौरा भी अभिभावकों को भेजा जा रहा है। एडमिशन में लेटलतीफी होने पर अतिरिक्त शुल्क जमा करने का मैसेज भी लगातार प्रसारित किया जा रहा है। आलम यह है कि जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण निजी स्कूल प्रबंधक नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
वर्जन - अगर किसी स्कूल के भीतर किताबें या अन्य सामाग्री बिक्री की जा रही हैं तो यह पूरी तरह से गलत है। शिक्षा विभाग से रिपोर्ट तलब कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी - कुंदन राज कपूर, एसडीएम, सकलडीहा।
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