चंदौली। जिले के क्रांतिकारी परगना महाईच और उसमें भी विकास खंड धानापुर में दो गहरवार क्षत्रपों के मध्य एक वीडियो संदेश को लेकर रोचक संग्राम छिड़ा है। और दोनों ही राजनीति के अपने अपने स्थान पर पुरोधा व स्वनाम धन्य है। जी ह ! मामला ऐसा ही है। बात कुछ यूं है कि साजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं सैयदराजा के पूर्व विधायक मनोज कुमार सिंह डब्लू धानापुर स्थित अपने कार्यालय के उद्घाटन के अवसर पर अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए एवं सैयदराजा विधायक सुशील सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि ओदरा निवासी ब्लॉक प्रमुख अजय सिंह जिनको खलनायक के नाम से भी जाना जाता है। जिन्होंने नेगुरा में 80 लाख रुपए के लगात से खेल मैदान बनवा दिया और उसका फीता काटने के लिए वर्तमान विधायक को आमंत्रित किया। जबकि वास्तविकता यह है कि प्रमुख ने तो 80 लाख लगा कर खेल मैदान का निर्माण कर अपने क्षेत्र की जनता में अपने गांव गिराव के पास अपने नाम की एक अक्षय कीर्ति खड़ी कर दी। परन्तु विधायक जो मात्र फीता काटते रह गए उनको 8 या 18 करोड़ में बड़े स्टेडिया का निर्माण कराना चाहिए था। इसी में प्रयुक्त खलनायक शब्द पर संग्राम छिड़ा हुआ है। सोशल मीडिया पर वाक युद्ध जारी है।

इसी की पड़ताल को लेकर कुछ लोगों के विचार

गोविंद उपाध्याय, संयोजक DVM

---- श्री मान अजय सिंह ब्लॉक प्रमुख एवं माननीय पूर्व विधायक सैयदराजा मनोज सिंह डब्लू दोनों ही हमारी धानापुर धरती के अपने क्षेत्र के महारथी है। हमको अपने इन गहरवार पुत्रों पर गर्व है। शब्दावली मर्यादित होनी चाहिए। ब्लॉक प्रमुख धानापुर की जनता का निर्वाचित प्रथम व्यक्ति है। इस लिए उनके नाम के साथ कोई अभद्र विश्लेषण या खलनायक नहीं लगाया जाना चाहिए।

पूर्व विधायक सैयदराजा मनोज कुमार सिंह डब्लू 

---- आप वीडियो को ध्यान से सुने मैने कहा है कि ओदरा का होने के नाते अजय सिंह ब्लॉक प्रमुख ने अपनी जनभावना का ध्यान रखते हुए अपने पड़ोसी गांव नेगुरा में 80 लाख की लगत से खेल मैदान बना कर स्थाई निर्माण किया। जो गौरव पुर्ण है। जहां तक बात खलनायक कहने की कही जा रही है तो प्रमुख जी जब प्रथम बार जिला पंचायत का चुनाव लड़ रहे थे तो उन्होंने अपने नामांकन के साथ संलग्न शपथ पत्र में स्वयं ही अजय सिंह खलनायक शब्द लिखा है। इसलिए अगर मैने खलनायक कहा है तो उसके जिम्मेदार बड़े भाई अजय सिंह जी ही है।

ब्लॉक प्रमुख अजय सिंह

---- पद सम्मान शिष्टाचार व मर्यादा शब्द अर्थ होता है। सबको अपनी मर्यादा के अनुसार और दूसरों के मर्यादा को ध्यान में रखते हुए टिप्पणी करने का अधिकार है। परन्तु टिप्पणी करने का तरीका मर्यादित ही होना चाहिए। जहां तक मेरे किसी प्रपत्र में खलनायक लिखे जाने का जिक्र पूर्व विधायक जी कर रहे है तो उनको इस तरह का साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहिए। दलीय मर्यादा चाहे जो भी हो मैं उनकी तरह मनोरंजन का साधन नहीं हूं। उनको बड़े दिल दिखाते हुए स्वीकार करना चाहिए कि गलत टिप्पणी हो गई।

सैयदराजा विधायक सुशील सिंह 

--- मनोज जी कुंठा के शिकार हो रहे है। वे मात्र 2012 से 17 तक ही विधायक रहे है। और उसमें लिए गए अपने वादों गंगा कटान, मेडिकल कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की प्रगति जनता के समक्ष नहीं रख पा रहे है। इसके विपरीत वर्तमान समय में चाहे विधायक निधि द्वारा या वर्तमान प्रमुख धानापुर द्वारा कराए गए जनउपयोगी कार्यों के कारण कुंठा के शिकार हो गए है। उनका आत्म विश्वास एवं टॉवर दोनों ही हिला हुआ है। ठीक वैसे ही जैसे तितलौकी और निम वैसे ही उनकी पार्टी और उनका नेतृत्व गुण और ज्ञान से परे है। उनको अपने आंकड़े रखने चाहिए नहीं तो फिर अपना इलाज करावे। यदि दिक्कत हो रही है तो शासकीय सहायता ले सकते हक।